ऋतुध्वज, Ritudhwaj, आदर्श बालकों की अमर कहानियां

Nov 21, 2017, 12:30 AM

परम पराक्रमी राजा शत्रुजीत के पुत्र थे ऋतुध्वज। महर्षि गालव एक दिन सूर्य के भेजे एक श्वेत अश्व कूवालय के साथ इनकी मदद माँगने आश्रम पहुँचे. धर्मरक्षा के प्रति निष्ठ व आतुर राजकुमार ऋतुध्वज सत्कर्म के लिए आश्रम में ही जाकर रहने लगे और अपने पराक्रम से दानवों से मुक्त करने के प्रयास करने लगे। ऋतुध्वज और मदलसा के प्रेम की पौराणिक कथा ने भी इनको अमर किया।

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