Aaram ka haq

Episode 6
Dec 01, 2020, 05:46 PM

Have you ever wondered what our mothers, sisters, and aunts did to unwind? Did they ever get the time to relax? What does leisure look like for women? Why is care work done by women called leisure? In the sixth episode of Local Diaries, Meera Jatav casts a feminist eye on women’s right to leisure through the festivals, songs, and games of Bundelkhand. The episode also features an immersive interview on women’s Right to Leisure and Joy with Surabhi Yadav, the founder of social enterprise Sajhe Sapne and Project Basanti - a multimedia project on women’s leisure. 

(क्या आपने कभी सोचा है कि हमारी माताओं, बहनों और मौसी ने आराम किस तरह किया? क्या उन्हें कभी आराम करने का समय मिला? महिलाओं के लिए अवकाश कैसा दिखता है? महिलाओं द्वारा फुरसत नामक देखभाल कार्य क्यों किया जाता है? लोकल डायरीज़ के छठे एपिसोड में, मीरा जाटव ने बुंदेलखंड के त्योहारों, गीतों और खेलों के माध्यम से महिलाओं के अवकाश के अधिकार पर एक नारीवादी नज़र डाली। इस एपिसोड में सामाजिक उद्यम प्रोजेक्ट बसंती- जो महिलाओं के अवकाश पर एक मल्टीमीडिया परियोजना है- के संस्थापक सुरभि यादव के साथ महिलाओं के अधिकार और खुशी के विषय पर एक व्यापक साक्षात्कार भी शामिल है।)